तेज इंडिया TV News 24
Reporter – Krishna Pratap Tripathi
News Agency
रेलवे ने रोकी गाजीपुर–मऊ रेल लाइन विस्तार परियोजना
गंगा पुल, भूमि अधिग्रहण और तकनीकी अड़चनों के चलते ठप हुआ बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट
गाजीपुर।
पूर्वांचल के विकास से जुड़ी गाजीपुर–मऊ रेल लाइन विस्तार परियोजना पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। भारतीय रेलवे ने तकनीकी, भूमि अधिग्रहण और बजट संबंधी जटिलताओं के कारण इस महत्वाकांक्षी परियोजना को रोक दिया है। यह परियोजना गाजीपुर को मऊ के रास्ते वाराणसी और बलिया से बेहतर रेल कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
परियोजना के तहत गाजीपुर से मऊ तक लगभग 37 किलोमीटर नई रेल लाइन बिछाने की योजना थी। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 1,766 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया गया था। बावजूद इसके, ज़मीनी स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई, जिससे पूरा प्रोजेक्ट अटक गया।
गंगा पर पुल बना सबसे बड़ी बाधा
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती गंगा नदी पर नया रेल पुल बनाना है। गाजीपुर में गंगा का बहाव तेज है और यहां मिट्टी की संरचना भी जटिल है। एक अनुमान के मुताबिक, गाजीपुर में गंगा पर रेल पुल से होकर गुजरने वाले मालगाड़ियों का वजन करीब 26 हजार टन तक होता है, जिससे पुल डिजाइन और सुरक्षा मानकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
2016 में रखी गई थी आधारशिला
इस परियोजना की आधारशिला 14 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी गई थी। योजना के अनुसार पहले चरण में गाजीपुर सिटी से मऊ तक नई लाइन और दूसरे चरण में इसे वाराणसी से जोड़ने का लक्ष्य था। इसके तहत लगभग 11 मीटर चौड़ा और 16.9 मीटर लंबा रेलवे रोड ब्रिज और कई छोटे- बड़े पुलों का निर्माण प्रस्तावित था।
70 गांवों में होना था भूमि अधिग्रहण
रेल लाइन के लिए गाजीपुर और मऊ जिलों के करीब 70 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जाना था। जानकारी के अनुसार, सिर्फ गाजीपुर जिले में ही लगभग 250 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी थी। किसानों और स्थानीय लोगों के मुआवज़े, आपत्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण अधिग्रहण की रफ्तार बेहद धीमी रही।

पूर्वांचल के विकास से जुड़ी थी उम्मीद
यह परियोजना पूर्वांचल के औद्योगिक, शैक्षिक और रोजगार विकास के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही थी। इसके पूरा होने से गाजीपुर, मऊ, बलिया और वाराणसी के लोगों को सीधा लाभ मिलता, साथ ही दिल्ली–हावड़ा रेल मार्ग पर यातायात का दबाव भी कम होता।
स्थानीय लोगों में निराशा
परियोजना के रुकने से स्थानीय जनता और व्यापारियों में निराशा है। लोगों का कहना है कि बार-बार घोषणाओं के बावजूद काम का ठप होना क्षेत्र के साथ अन्याय है। अब सभी की निगाहें रेलवे बोर्ड और केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि यह परियोजना दोबारा कब रफ्तार पकड़ेगी।
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