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बीएससी फाइनल फिजिक्स की किताब में पृथ्वी की आयु को लेकर विवाद, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बताया जा रहा गलत
तेज इंडिया TV News 24
रिपोर्टर: कृष्ण प्रताप त्रिपाठी | CMD डेस्क

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जा रही बीएससी फाइनल (6th सेमेस्टर) फिजिक्स की एक पुस्तक में पृथ्वी की आयु को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। किताब के “Radioactive Decay: The Age of Earth” अध्याय में वैज्ञानिक गणनाओं के आधार पर पृथ्वी की आयु लगभग 5 से 5.9 अरब वर्ष बताई गई है।
किताब में यूरेनियम और लेड के रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay) की गणना के माध्यम से यह निष्कर्ष निकाला गया है कि पृथ्वी की आयु अरबों वर्षों में है।
हालांकि इस दावे पर अब आध्यात्मिक और पारंपरिक विचारधाराओं से जुड़े लोगों ने गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भारतीय धर्मग्रंथों और आध्यात्मिक परंपराओं में सृष्टि और पृथ्वी के निर्माण की अवधारणा इससे भिन्न है, इसलिए केवल भौतिक गणनाओं के आधार पर पृथ्वी की आयु तय करना अपूर्ण और भ्रामक हो सकता है।

आलोचकों का कहना है कि
आध्यात्मिक ग्रंथों में सृष्टि को अनादि और चक्रों में चलने वाली प्रक्रिया बताया गया है।
इसलिए पृथ्वी की आयु को निश्चित वर्षों में बांधना आध्यात्मिक दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता।
इस विषय को लेकर अब शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और आध्यात्मिक विचारकों के बीच बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने मांग की है कि ऐसी पुस्तकों में वैज्ञानिक सिद्धांतों के साथ-साथ विभिन्न वैचारिक दृष्टिकोणों का भी उल्लेख किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को व्यापक समझ मिल सके।
फिलहाल यह मामला शैक्षणिक और वैचारिक चर्चा का विषय बन गया है और छात्रों के बीच भी इस पर बहस जारी है।







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