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रिपोर्टर: कृष्णा प्रताप त्रिपाठी

CMD डेस्क
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 13 साल से वेजिटेटिव स्टेट में पड़े हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति
नई दिल्ली से एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील खबर सामने आई है। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने 13 वर्षों से वेजिटेटिव स्टेट में जीवन बिता रहे Harish Rana को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) की अनुमति दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल न्यायमूर्ति J. B. Pardiwala और न्यायमूर्ति K. V. Viswanathan ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि—
“संविधान के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है, और उसी प्रकार गरिमा के साथ मरने का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है।”
🏥 एम्स दिल्ली को दिया गया विशेष निर्देश
अदालत ने देश के प्रतिष्ठित अस्पताल All India Institute of Medical Sciences, New Delhi (एम्स) को निर्देश दिया है कि हरीश राणा को तुरंत भर्ती किया जाए और मेडिकल बोर्ड की निगरानी में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया पूरी की जाए।
📌 क्या है पूरा मामला
हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से वेजिटेटिव स्टेट में हैं।
गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण वे स्वयं कोई निर्णय लेने या सामान्य जीवन जीने की स्थिति में नहीं हैं।
लंबे समय से चल रहे इस मामले में परिवार और कानूनी पक्षों ने अदालत से राहत की मांग की थी।
विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट और कानूनी तर्कों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
⚖️ क्यों माना जा रहा है ऐतिहासिक फैसला
यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत में मानवीय गरिमा और जीवन के अधिकार की संवैधानिक व्याख्या को और स्पष्ट करता है।
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने सीमित परिस्थितियों में पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति देने के सिद्धांत को स्वीकार किया था, लेकिन यह मामला लंबे समय से वेजिटेटिव स्टेट में पड़े मरीज से जुड़ा होने के कारण विशेष महत्व रखता है।







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