कानून होने के बावजूद दहेज प्रथा पर प्रभावी रोक नहीं
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दहेज निषेध अधिनियम–1961 के क्रियान्वयन पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

कानून होने के बावजूद दहेज प्रथा पर प्रभावी रोक नहीं
दहेज हत्या के पुराने मामले में बड़ा न्यायिक संदेश
कानून के दुरुपयोग और कमजोर क्रियान्वयन पर चिंता
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दहेज निषेध अधिनियम–1961 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा है कि दहेज उन्मूलन के लिए कानून बने हुए छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इसके अमल में कई व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आ रही हैं, जिसके चलते कई मामलों में दोषी सजा से बच निकलते हैं।
यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई के दौरान की गई। यह मामला वर्ष 2001 के एक दहेज हत्या प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए आरोपियों को बरी कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया और ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को बहाल कर दिया। हालांकि, अदालत ने मानवीय आधार पर 94 वर्षीय महिला दोषी को जेल भेजने से फिलहाल छूट दी है, लेकिन अन्य आरोपियों को चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
खुले तौर पर दहेज मांगने वाले बच जाते हैं – कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि कई मामलों में दहेज मांगने और लेने की बात स्पष्ट रूप से सामने आने के बावजूद आरोपियों को सजा नहीं मिल पाती, जो कानून की मंशा के विपरीत है। अदालत ने माना कि दहेज निषेध अधिनियम के तहत दोष सिद्ध करना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
न्यायालयों को मामलों में देरी से बचने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों और उच्च न्यायालयों को यह भी निर्देश दिया कि दहेज और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए, ताकि पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय मिल सके और समाज में गलत संदेश न जाए।
दहेज जैसी सामाजिक बुराई पर सख्त रुख जरूरी
अदालत ने स्पष्ट किया कि दहेज जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका सख्त, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से पालन भी उतना ही जरूरी है।
रिपोर्ट – कृष्णा प्रताप त्रिपाठी
तेज इंडिया TV News 24







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