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मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत–जीरामजी’ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव, सियासी हलचल तेज

तेज इंडिया TV News 24
Reporter: Krishna Pratap Tripathi
ब्यूरो चीफ, उत्तर प्रदेश (TIT NEWS 24)


मनरेगा की जगह ‘विकसित भारत–जीरामजी’
ग्रामीण रोजगार नीति में बड़ा बदलाव, सियासी हलचल तेज
नई दिल्ली।
केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत–जीरामजी (गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण)’ लाने की तैयारी कर ली है। इस प्रस्तावित विधेयक को 2025 में संसद के पटल पर लाने की योजना है। सरकार का दावा है कि यह योजना केवल मजदूरी तक सीमित न होकर ग्रामीण भारत के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगी।
100 से 125 दिन रोजगार की वैधानिक गारंटी
सरकार के अनुसार, नई योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिनों की बजाय 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। यह बदलाव बीते 20 वर्षों में ग्रामीण सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है।
सरकार का तर्क: बदलीं ग्रामीण परिस्थितियां
ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि बीते दो दशकों में ग्रामीण भारत की आवश्यकताएं बदली हैं। केवल अस्थायी मजदूरी के बजाय अब स्थायी आजीविका, कौशल विकास और गांवों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है।


कैबिनेट से मंजूरी, संसद में पेशी की तैयारी
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इसे लोकसभा सदस्यों को सौंप दिया गया है। सरकार इसे मौजूदा सत्र या आगामी बजट सत्र में चर्चा के लिए लाने की तैयारी में है।
मनरेगा पर उठे सवाल: भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के आरोप
सरकार ने स्वीकार किया है कि मनरेगा के क्रियान्वयन में कई संरचनात्मक कमियां सामने आईं।
कई राज्यों में फर्जी जॉब कार्ड
बिना काम के भुगतान
फंड के दुरुपयोग के आरोप
शिकायतों के निस्तारण में देरी
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के कई जिलों में सामने आए मामलों के बाद केंद्र सरकार ने पूरे ढांचे की समीक्षा की।
विकसित भारत–जीरामजी: सिर्फ मजदूरी नहीं, समग्र मिशन
ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह नई योजना केवल रोजगार देने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि—
गांवों को आत्मनिर्भर बनाना
बुनियादी ढांचे को मजबूत करना
कृषि, पशुपालन और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना
विभिन्न योजनाओं के बीच बेहतर तालमेल
इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य होगा।
विपक्ष का हमला: गरीबों के अधिकारों पर चोट
विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस और वाम दलों का आरोप है कि सरकार मनरेगा को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों की “आर्थिक ढाल” रहा है और इसमें बदलाव से असुरक्षा बढ़ेगी।
राजनीतिक मायने: 2025 से पहले बड़ा दांव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ग्रामीण वोट बैंक को साधने और विकास के नए नैरेटिव को स्थापित करने की कोशिश है। सरकार इसे “विकसित भारत” के विज़न से जोड़कर पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति करार दे रहा है।
ग्रामीण भारत की दिशा बदलेगी या बढ़ेगा विवाद?
अब निगाहें संसद की बहस पर टिकी हैं। क्या ‘विकसित भारत–जीरामजी’ वास्तव में ग्रामीण भारत को नई दिशा देगा, या मनरेगा की जगह लेना सरकार के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित होगा—यह आने वाला समय बताएगा।
(क्रमशः… राजनीतिक विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्ट अगले अंक में)

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