HomeUttar Pradeshप्रशासनिक कार्यप्रणाली ही नहीं… बल्कि सनातन आस्था और न्याय व्यवस्था पर भी...

प्रशासनिक कार्यप्रणाली ही नहीं… बल्कि सनातन आस्था और न्याय व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल ?

🎙️ तेज इण्डिया TV News 24

🎤 Reporter: Mukesh Singh Jaisraj 📍 Lucknow, Uttar Pradesh, India

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है… जिसने सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली ही नहीं… बल्कि सनातन आस्था और न्याय व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला एक ऐसे महादेव मंदिर का है… जो पिछले लगभग 55 वर्षों से गांव की आस्था का केंद्र रहा है। जहां पीढ़ियों से पूजा होती रही… जहां घंटियों की आवाज़ के साथ गांव की सुबह शुरू होती रही… आज वही मंदिर… जमीन विवाद और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच घिरता दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath लगातार अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं कि प्रदेश में हर जमीनी विवाद का निष्पक्ष समाधान हो… लेकिन सवाल यह है कि — क्या इस मामले में निष्पक्षता हुई?

मंदिर पक्ष का आरोप बेहद गंभीर है। कहा जा रहा है कि कुछ लोगों ने प्रशासनिक मिलीभगत के सहारे मंदिर की जमीन ही नहीं… बल्कि महादेव मंदिर के हिस्से तक को निजी भूमि में दिखाने की कोशिश की।

स्थानीय लोगों के मुताबिक… वर्षों से जिस स्थान को धार्मिक स्थल माना जाता रहा… आज उसी पर सीमांकन के नाम पर विवाद खड़ा कर दिया गया।

और सबसे बड़ा आरोप — मंदिर के पुजारी जी की बात को लगातार नजरअंदाज किया गया।

पुजारी जी का कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी… लेकिन उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया। यहां तक कि मानसिक प्रताड़ना तक के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि उन्हें यह तक कहा गया — “प्रशासन आपके लिए नहीं है।”

ज़रा सोचिए… जिस सनातन परंपरा ने समाज को जोड़े रखा… जिस मंदिर में वर्षों से लोग माथा टेकते रहे… अगर उसी मंदिर का पुजारी खुद को असहाय महसूस करे… तो यह केवल एक व्यक्ति का दर्द नहीं… बल्कि व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।

मामला उस वक्त और भड़क गया… जब विवादित क्षेत्र में प्रशासन द्वारा पिलर लगाए गए।

आरोप है कि लगातार अपमान और तनाव से आहत पुजारी जी ने गुस्से में आकर उन्हीं पिलरों को उखाड़ फेंका। अब उसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

लेकिन असली सवाल वीडियो नहीं है…

असल सवाल यह है कि — क्या 55 साल पुराने मंदिर के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच हुई? क्या राजस्व अभिलेखों और धार्मिक इतिहास को गंभीरता से परखा गया? क्या प्रशासन ने दोनों पक्षों को समान रूप से सुना? और अगर कोई व्यक्ति लगातार न्याय की गुहार लगा रहा था… तो समाधान समय रहते क्यों नहीं निकाला गया?

स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के कई प्रभावशाली लोग प्रशासन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं… जिससे पुजारी जी खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रहे हैं।

अब गांव के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग कर रहे हैं कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए… और यदि कहीं गलत सीमांकन… दबाव… या प्रशासनिक लापरवाही हुई है… तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

क्योंकि यह मामला अब सिर्फ जमीन का नहीं रहा…

यह मामला है — सनातन आस्था का… न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता का… और प्रशासनिक जवाबदेही का।

फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर इस मामले पर है… और सबसे बड़ा सवाल यही —

क्या महादेव मंदिर को न्याय मिलेगा?

कैमरा पर्सन के साथ… मैं मुकेश सिंह जैसराज… तेज इण्डिया TV News 24… लखनऊ, उत्तर प्रदेश।”

🔴 “हर खबर पर तेज नज़र…” 🔴 “तेज इण्डिया TV News 24”


तेज इंडिया TV News 24
तेज इंडिया TV News 24
I am Reporter and reporting all over India.
RELATED ARTICLES
Jharkhand
overcast clouds
28.1 ° C
28.1 °
28.1 °
77 %
1.7kmh
89 %
Sat
28 °
Sun
34 °
Mon
32 °
Tue
31 °
Wed
29 °

Most Popular

error: Content is protected !!