
तेज इंडिया TV News 24
Reporter: Anita Singh | ब्यूरो हेड, लखनऊ

टीईटी अनिवार्यता और गैर-शैक्षणिक कार्यों पर शिक्षकों में रोष, आंदोलन की चेतावनी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में टीईटी ( Teacher eligiblity Test ) को अनिवार्य किए जाने, वेतन विसंगतियों और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर प्राथमिक शिक्षकों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इन मुद्दों को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
संघ का कहना है कि टीईटी अनिवार्यता के कारण प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक मानसिक रूप से आहत और निराश हैं। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण व्यवस्था अव्यवहारिक है, समयबद्धता और संसाधनों का अभाव है, जिससे शिक्षकों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव पड़ रहा है।
संघ की प्रमुख मांगें

टीईटी अनिवार्यता पर तत्काल पुनर्विचार
वेतन विसंगतियों का शीघ्र समाधान
शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए
टीईटी से प्रभावित शिक्षकों को तत्काल अवकाश प्रदान किया जाए
बैठक में उठा आंदोलन का मुद्दा
रविवार को हजरतगंज स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन में आयोजित शिक्षकों की बैठक में इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने की। उन्होंने कहा कि वेतन विसंगतियों को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। संघ का कहना है कि शिक्षकों को प्रताड़ित करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षकों में बढ़ता असंतोष


शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर उन पर प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ डाला जा रहा है, जिससे कक्षा शिक्षण प्रभावित हो रहा है। इससे न केवल शिक्षक, बल्कि छात्र भी नुकसान उठा रहे हैं।
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