
तेज इण्डिया TV News 24
रिपोर्टर – Krishna Pratap Tripathi
News Agency | CMD DESK
स्थान – बांसडीह, बलिया (उत्तर प्रदेश)

EXCLUSIVE | 11 केवी हाईटेंशन तार बना काल, खेत में करंट से पिता-पुत्र की मौत; विधायक के एक्शन से गरमाई बहस

बांसडीह क्षेत्र के सहपुरवा गांव में गुरुवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। खेत में पहले से गिरे 11 केवी हाईटेंशन विद्युत तार की चपेट में आने से पिता और पुत्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे के बाद गांव में मातम का माहौल है, जबकि ग्रामीणों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है।

गांव में पसरा मातम, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार खेत में गिरे हाईटेंशन तार में करंट प्रवाहित हो रहा था। इसी दौरान पिता और पुत्र उसकी चपेट में आ गए। दोनों को बचाने का मौका तक नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

बिजली विभाग पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते टूटे हुए तार की सूचना पर विभाग ने कार्रवाई की होती या बिजली आपूर्ति तत्काल बंद कर दी गई होती, तो यह हादसा टल सकता था। लोगों ने विभागीय लापरवाही की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

विधायक केतकी सिंह का एक्शन चर्चा में
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय विधायक केतकी सिंह भी मौके पर पहुंचीं। घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए उन्होंने बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता (XEN) को भी मौके पर बुलाया।
इस दौरान उनका XEN का हाथ पकड़कर घटनास्थल तक ले जाना सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। विधायक का कहना था कि अधिकारियों को घटनास्थल की वास्तविक स्थिति स्वयं देखनी चाहिए ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।

क्या विधायक ने सही किया?
जनप्रतिनिधि का दायित्व जनता की समस्याओं को गंभीरता से उठाना और अधिकारियों को जवाबदेह बनाना है। यदि विधायक का उद्देश्य घटनास्थल की वास्तविक स्थिति दिखाना और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करना था, तो इसे जवाबदेही तय करने की पहल के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, किसी भी अधिकारी के साथ व्यवहार कानून और प्रशासनिक मर्यादा के अनुरूप होना भी आवश्यक है। इस पहलू पर लोगों की अलग-अलग राय हो सकती है।

क्या सच में XEN दोषी है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर केवल XEN को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। किसी दुर्घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी जांच आवश्यक होती है। यह जांच करेगी कि:
तार कब और क्यों टूटा?
विभाग को पहले से सूचना मिली थी या नहीं?
यदि सूचना मिली थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई?
रखरखाव और निगरानी में किस स्तर पर चूक हुई?

यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तभी उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना उचित नहीं है।

अब सबकी नजर जांच पर
इस दर्दनाक हादसे ने बिजली व्यवस्था, रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं प्रशासन और बिजली विभाग की आगामी कार्रवाई पर पूरे क्षेत्र की नजर बनी हुई है।

(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है। दुर्घटना की वास्तविक जिम्मेदारी संबंधित विभागीय एवं प्रशासनिक जांच के बाद ही आधिकारिक रूप से तय होगी।)







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